आज फिर बारिश हुई

आज फिर बारिश हुई कोई नाव नहीं बनाई फुटबाल भी नहीं खेला बारिश में चाय पकोड़े नहीं ढूंढे कुछ भी बचकाना नहीं किया जो मैं करता था जो करना मुझे पसंद था जिसके लिए मैं बारिश का इंतज़ार करता था चेहरे पे बुँदे अच्छी नहीं लगती पानी में छप छप परेशान करता हैं गीले कपडे…

By Samir
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दर्द की तहे

ये दर्द की तहे मुझे समझ नही आती, जब भी लगता हैं उभर गए, उभर जाता हैं संभलते हैं जब भी उनके जाने के गम से बिछड़ा हुआ कोई दिल से गुजर जाता हैं ज़िन्दगी जब लेती हैं इम्तेहान समीर रात बीतती नही, न सहर आता हैं दर्द से भागें है हम उम्रभर, अब समझे…

By Samir
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मासूमियत का मरना जरूरी हैं

पता नही क्यों अब इस बात पे यकीन हो चला है कामयाबी के लिए मासूमियत का मरना जरूरी हैं हर थके मांदे को पानी पिलाना मुमकिन नही कुछ नेकियों का नजरअंदाज होना जरूरी हैं वो बढ़ गए जिनके लिये मैं रुक गया अपनी राह में समझा राहे-मंजिल में खुद गरजमंद होना जरूरी हैं पसंद नापसंद,…

By Samir
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फिर वापस वो क्यों आये

अभी तो थोड़े सूखे थे कपडे, फिर ये बादल क्यों हैं छाए अभी तो संभले थे हम ज़रा सा, फिर वापस वो क्यों आये नहीं आती वफाये तुमको तो थोड़ी रवायतें ही सीखो तुमको जाना हैं तो पूरा जाओ किस्तों में हम क्यों मर जाये अब न होगा हमसे कुछ भी हमने सीखे अब नए…

By Samir
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ये रात भी कट जाएगी

लगता हैं सब खत्म हो गया इस तिमिर के उस पार मेरे लिए अब कुछ भी नही कोई सुबह नही हैं मेरे लिए हर उम्मीद हैं कुचली दूर तक घुप्प अंधेरा, दम घोंटता सन्नाटा दिशाहीन मन, विचिलित हृदय , लगता हैं सब खत्म हो गया लेकिन लेकिन दूर कहीं एक रोशनी का सिरा मुझसे कह…

By Samir
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